Saturday, July 10, 2010

LIVING LIFE ON THE EDGE

After thinking for a long time i am going to write my new blog on the title “living life on the edge”. There’s a famous quote which goes-

"Most People Die When They're 23 and Aren't Buried Until They're 70!"
~ Benjamin Franklin

This quote is truly applicable in our life also. We always try to find some sort of logic or rhythm in our life but it ultimately makes our life quiet predictable and boring. Today we are also operated like a machine and this predictability have made our life as hell. And to add our irony we this kind of change in our life as maturity.

But this kind of maturity is nothing but a fucking nonsense. Life is to be lived with innocence not maturity. It should be lively and full of couloirs and enthusiasm. Do something different today. Something fun. Something you've always wanted to do but couldn't. Stop waiting for that perfect time or moment. If its not in your budget, find a way or keep saving, and do something else that is fun. Don't let money stop you. In fact don’t let anything stop you.

On the edge is where you live life completely. It’s where you take risks and go for the things you want. It’s a way of living where you are liberated from your own limitations and no longer prisoner to them. It’s an awakening to living your life the way it was meant to be lived.

Thus it goes without saying that life is to be lived on the edge. If you want to sing then just sing, want to slap ur boss then slap him. Do everything which u can say its crazy and then see how the life changes. Life is a crazy in nature itself so how cum u avoid doing crazy things.

I hope this message goes to all my readers and could bring some urgently required changes. Never play safe in ur life. Always take risks and challenges.

Thats all for today! Would come wid smthing xciting next time. Don’t 4get to give ur valuable comments. Till then

BYE!

CHAO!!!

1 comment:

  1. देखो चुनाव फिर आया है
    कुछ लोगों का मन ललचाया है
    घूमते हैं जो खद्दर पहनकर
    देते हैं हमें धोखा भोला समझ कर
    हर बार हमें निचा दिखाते हैं
    पर हम क्यूँ इतने मजबूर हैं
    जो इन्हें ही मत दे आते हैं

    जीतकर मंत्री बन जाना
    फिर अपनी शक्ल न दिखलाना
    ये इनकी फितरत है
    तरह तरह के वायदे करना
    बिजली पानी का आश्वाशन देना
    बस उन्हें यही आता है
    कोई चीज में महारथ हासिल नहीं
    पर भाषण देना खूब आता है

    जात- पात का भेद बढाया
    धर्म को धर्म से इन्होने लरवाया
    ये सत्ता -सुख का ले मज़ा
    हम गरीबी,बेरोज़गारी की काटे सजा
    सिर्फ चाँद वोटों के खातिर
    ये हर हद से गुज़रते हैं
    फिर भी क्यूँ इन्हें हम मत देते हैं
    लोकतंत्र को हाशिये पर रख
    ये नेता हमको ठगते हैं

    क्यूँ हम इतने निर्बल हो जाते हैं
    क्यूँ अपनी ताक़त को न पहचानते हैं
    सिर्फ नारे लगाने से कुछ ना होगा
    अब तो कुछ हमको करना होगा
    लोकतंत्र को जीवित गर रखना है
    भ्रष्टाचार से अगर हमें लरना है
    तो पहचानो ऐसे नेताओं को
    न खेल सके अब देश से वो

    पहचानो अपने मत की ताक़त
    अब तो समझो वक़्त की नज़ाक़त
    जाओ ढूंढ निकालों उन बहरूपियों को
    जो झूठे वादे करते हैं
    नहीं चाहिए ऐसे नेता
    जो धर्म से धर्म को लराते हों
    वोटों का व्यापार चलाते हो
    जिन्हें नहीं है फ़िक्र जवानों की
    जिन्हें नहीं खबर है किसानों की
    सिर्फ खद्दर पहनकर इतराते हैं
    खुद को गाँधी का शिष्य बताते है
    ऐसे लोगों को औकात दिखाना है
    अब देश को तुम्हे बचाना है

    क्या अपना सपना पूरा होगा
    कोई नेता जो हो सच्चा
    कभी भारत में अवतरित होगा
    फिर से आएगा कोई सुभाष
    क्या बची है इसकी कोई आस
    क्या आएगा फिर लाल बहादुर सा
    क्या अब है कोई नेता उन जैसा
    फिर भी कोशिश करना ही होगा
    नया सवेरा तब ही आएगा
    लोकतंत्र को लाज बचाने
    कल सच्चा नेता आयेगा
    तुम मत की शक्ति को पहचानो
    तुम इसका करो सदुपयोग
    भ्रष्ट नेता न तुमे ठग पायें
    न करें वे इसका दुरूपयोग
    न करें वे इसका दुरूपयोग

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